उपाय के लिए बुध के तांत्रिक बीज मंत्र को जाप करके सिद्ध करने का मेरा प्रयास और उसके परिणाम
मैं साल 2023 से ज्योतिष की पढ़ाई कर रहा हूँ। शुरुआत में मैंने पाराशरी ज्योतिष पढ़ा और यह पढ़ाई मैंने साल 2026 की शुरुआत तक की। इस बीच भृगु नाड़ी, जेमिनी ज्योतिष और ज्योतिष की कई अन्य शाखाओं के बारे में मैंने सीखा, जाना और समझा। ज्योतिष की दुनिया में मैंने कई सारे ऐसे महामूर्खों को महान माना, जो सिर्फ लोगों के बीच प्रख्यात हैं, लेकिन उनमें ज्योतिष के ज्ञान की कमी है। और उन्हीं लोगों की वजह से ज्योतिष में मैंने उपायों पर भी अपना काफी सारा समय व्यर्थ किया।
अच्छी बात यह थी कि मैं गणित का विद्यार्थी था और पढ़ाई में बहुत ही अच्छा था, तो मुझे भौतिक विज्ञान और गणित की अच्छी समझ थी। 2026 में मुझे नाड़ी ज्योतिष के बारे में पता चला और एक अच्छे शिक्षक से मैं इसे सीख पाया, जिन्होंने मेरे दिमाग से ज्योतिष की दुनिया में जितना भी कचरा था, उसे बाहर निकाल दिया। यह जो शिक्षक हैं, उनका मैं नाम इसलिए नहीं बताना चाहता क्योंकि अगर मैं बता दूँगा तो शायद आप में से कई लोग मुझे फालतू समझकर मेरे इस अनुभव को, जिसके बारे में मैंने यह लेख लिखा है, नहीं पढ़ेंगे। जो मेरे शिक्षक हैं, वह बहुत ही ज्यादा ज्ञानी व्यक्ति हैं, लेकिन सीधी और सत्य बात करते हैं और लोगों के भ्रम को तोड़ते हैं, जिसकी वजह से उनकी बातें तीर की तरह इन अंधभक्तों और चाटुकार नव-ज्योतिषियों को चुभती हैं और फिर वे मेरे शिक्षक की बुराई करते हैं, जिसे सुनकर मुझे क्रोध भी आता है और हँसी भी।
पाराशरी ज्योतिष महान है, लेकिन अधूरी है। इसमें गिनती के बस अच्छे ज्योतिषाचार्य इस दुनिया में मौजूद हैं और 99.99 प्रतिशत ज्योतिषाचार्य फर्जी हैं या अधूरे ज्ञानी हैं। पाराशरी ज्योतिष सीखने सीखने से पहले बेहतर होगा नाड़ी ज्योतिष सीखा जाए।
एक और प्रख्यात ज्योतिषाचार्य कृष्णमूर्ति जी ने भी इसे अपने ज्ञान और मत के अनुसार सीखा और इसका अध्ययन किया। इसमें कुछ अपने हिसाब से जोड़-घटाव करके अभ्यास किया और अपने विद्यार्थियों को सिखाया। फिर उनके विद्यार्थियों ने इसे कृष्णमूर्ति पद्धति या केपी ज्योतिष के नाम से प्रख्यात कर दिया।
ज्योतिष में और भी कई शाखाएँ थीं, जो अपने आप को नाड़ी ज्योतिष कहती थीं। इसकी वजह से हमारे असली नाड़ी ज्योतिष के जो विद्यार्थी थे, उन्होंने इसे नक्षत्र नाड़ी ज्योतिष कहना शुरू कर दिया।
और इसी ज्योतिष की शाखा को जब मैं अपने शिक्षक के माध्यम से पढ़ा, तब मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि हर चीज पहले से लिखी गई है और फ्री विल सिर्फ एक छलावा या झूठ है और कोई भी प्रकार का उपाय किसी भी चीज को बदल नहीं सकता। आपकी कुंडली में जो लिखा है, वह होकर ही रहेगा। कोई पूजा, मंत्र जाप, व्रत, दान, कोई रत्न या कोई भी उपाय विधि के विधान को नहीं बदल सकता।
कई सारे लोग जो चीज मैंने ऊपर लिखी है, उसे पढ़ने के बाद या तो मुझे मूर्ख समझ रहे होंगे या मुझसे बहस करना चाहते होंगे। लेकिन न मुझे किसी से बहस करना है और न ही मुझे अपने आप को किसी को सही साबित करना है। सही होना या गलत होना, इस बड़ी-सी माया में कोई मतलब नहीं रखता।
लेकिन इसके बावजूद, क्योंकि मेरे शिक्षक ने नाड़ी ज्योतिष पर अपनी जो किताब लिखी है, उसमें कुछ उपायों का जिक्र किया है, जिसमें रत्न और मंत्र शामिल हैं, इसकी वजह से मेरे मन में यह विचार उठा कि मैं जरूर उपाय को नहीं मानता हूँ, लेकिन बिना इसका प्रयोग किए इसे कट्टर रूप से नकार देना सही नहीं होगा। इसलिए पहले इनका उपयोग करके देखना चाहिए और उसके बाद, जब कुछ न हो, तब यह विचार रखना चाहिए।
एक असली रत्न को खरीदने में हजारों-लाखों रुपये लगते हैं, जिसकी वजह से रत्न वाले उपाय का इस्तेमाल करके देखना मेरे लिए संभव नहीं था। बचपन से ही मैंने अपने आसपास ऐसे हजारों लोग देखे हैं, जो रत्न वाली अंगूठियाँ पहनते हैं, लेकिन फिर भी उनके जीवन पर ऐसा कोई प्रभाव नहीं आया है, जो उनकी कुंडली से अलग हो। यह भी एक कारण था कि मैं रत्न वाला उपाय करके नहीं देखना चाहता था और कट्टर रूप से यह मानता था कि रत्न से भी ऐसा कुछ नहीं हो सकता, जो कुंडली में न लिखा हो।
रत्न का जिक्र ऋषि-मुनियों की पुरानी पुस्तकों में भी ज्यादा नहीं मिलता है, लेकिन मंत्रों का जिक्र मिलता है और मंत्र जाप करने में कोई पैसा खर्च नहीं होता है। इसलिए मैंने सोचा कि इसके साथ ही प्रयोग किया जाना चाहिए। तो मेरे शिक्षक की पुस्तक में बीज मंत्र का जिक्र था और उनके बनाए गए वीडियो में उन्होंने किस ग्रह का मंत्र जाप कितनी बार और कितने दिनों के अंदर किया जाना चाहिए, यह सब बताया था। उस ज्ञान को लेकर मैंने निश्चित किया कि अब मैं अपनी महादशा के स्वामी बुध के बीज मंत्र का 21 दिनों के अंदर 9000 बार जाप करूँगा।
नाड़ी ज्योतिष के अनुसार मेरा बुध ग्रह अच्छा था और मुझे अच्छे फल प्रदान कर सकता था। इस वजह से मैंने उसे चुना।
बृहद पाराशर होरा शास्त्र में अध्याय 80 से 85 के बीच ऋषि पराशर बुध की मूर्ति कैसी बनाई जानी चाहिए, इसके बारे में भी बताते हैं। बताई गई इस रूपरेखा का इस्तेमाल करके मैंने एआई से एक फोटो बनवाई।
इसी फोटो के सामने एक दिया जलाकर बुधवार के दिन से जाप करना शुरू किया। उस दिन की तारीख थी 9 सितंबर 2026।
मंत्र संकल्प जो मैंने देवता के सामने किया था, वह था कि 21 दिनों के अंदर मैं 9000 जाप पूर्ण करूँगा।
बृहद पाराशर होरा शास्त्र में ही बुध के मंत्रो को ९ हजार बार जाप करने का निर्देश दिया है ऋषि पराशर ने।
उत्तर दिशा की तरफ मुख करके मैंने यह मंत्र संकल्प पूरा किया। रोज नहा-धोकर साफ-सुथरा होकर।
मेरा मंत्र जाप करने का जो उद्देश्य था, वह पूर्ण रूप से भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति, महादशा में सारे कष्टों में कमी और अपने प्रिय इंसान से वापस बातचीत शुरू होने की इच्छा थी।
मंत्र जाप शुरू करते ही ये घटनाएँ मेरे जीवन में हुईं, जिन्हें बुध ग्रह मेरी कुंडली में नियंत्रित करता है और जो मैं चाहता भी था:
मेरा अपनी उम्र और अपने समाज के लोगों से बातचीत हुआ, जो कि पहले नहीं होता था और जिसका मुझे बहुत अफसोस होता था।
पता नहीं कैसे लेकिन मैंने एक ऐसे इंसान को अनब्लॉक कर दिया जिसने मुझे बहुत तकलीफ दिया था और मई उस तकलीफ से आगे नहीं बढ़ पा रहा था।
बहुत समय से मैं एक दस्तावेज पर स्वीकृति चाहता था, जो नहीं मिल रही थी और अस्वीकृति का कारण भी नहीं बताया जाता था। मंत्र जाप शुरू होने के बाद स्वीकृति न मिलने का कारण भी बताया गया और उस स्वीकृति को आसानी से कैसे पाया जा सकता है, यह भी मुझे पता चल गया।
एक छोटी-सी यात्रा हुई।
जिस दिन मंत्र संकल्प पूर्ण हुआ, उस दिन रात भर नींद नहीं आई और पूरे शरीर में एक अजीब-सी गर्मी का एहसास हुआ।
कोई बहुत बड़ी घटना नहीं हुई लेकिन ये सारी चीजें जो हुयी वो मेरे लिए महत्वपूर्ण थी और बहुत समय से अटकी पड़ी थी और मन ही मन मुझे इंतजार था इनके होने का।
खास बात यह है कि इनमें से जितनी भी चीजें हुईं, वे सभी इस तरह से नहीं हुईं कि मेरी कुंडली की दशा उन्हें अनुमति न देती हो, यानी सारी चीजें दशा और कुंडली के अनुरूप ही हुईं। लेकिन बड़ा प्रश्न यह था कि यह तभी क्यों हुआ, जब मैं मंत्र जाप कर रहा था और इससे पहले या इसके बाद क्यों नहीं हुआ। ये सभी कार्य बहुत समय से अटके हुए थे और मुझे बहुत समय से उनके होने का इंतजार था।
हो सकता है कि यह एक संयोग हो, या हो सकता है कि यह मंत्र का प्रभाव हो, लेकिन एक बात निश्चित है कि ऐसा कुछ नहीं हो सकता, जो कुंडली में न लिखा हो या जिसकी अनुमति दशा न देती हो और आप उपाय करके उस चीज को होने के लिए मजबूर कर दें।
कई बार कई सारे लोग पूजा-पाठ और भक्ति में डूबे हुए होते हैं और अपनी भक्ति के बीच कब अपना घमंड घुसा देते हैं, उन्हें पता ही नहीं चलता। वे ऐसा सोचने लगते हैं कि वे भगवान को दो फूल चढ़ाएँगे और दो शब्द अनुरोध करेंगे और चीजें उनके हिसाब से हो जाएँगी। भगवान शक्तिशाली हैं, लेकिन वे आपके हिसाब से नहीं चलेंगे, बल्कि विधि का विधान जो लिखा है, हर चीज वैसी ही होगी। इतिहास ने आपसे बड़े कई सारे भक्तों को देखा है, जिन्होंने अपने दस-दस सिर काटकर भी भगवान को चढ़ा दिए और फिर भी विधि का विधान बदल नहीं पाए।
इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद हो सकता है की कुछ ज्यादा ज्ञानी बाबा ये तर्क दें की मैने मंत्र सही से उच्चारण नहीं किया होगा, या मंत्र संकल्प किसी गुरु की उपस्तिथि मे करनी चाहिए या ये मंत्र जाप लगातार करना होता है या हवन आहुति करनी होती है. ऐसे ज्ञानी तरह तरह के ढकोसले बतायेंगे जबकि सच यह है की इन्होंने खुद मेरी तरह कभी इन चीजों को खुद करके परखा नही होगा सिर्फ कहीं पढ़ा होगा ।
आप सभी से आग्रह है की पहले खुद आप मेरी तरह, अपने अनुसार एक मंत्र संकल्प करें उस विधि से जिसे आप सही मानते है और फिर आपके जीवन मे अगर ऐसे बदलाव आये जिसकी अनुमति नाड़ी ज्योतिष के अनुसार आपकी कुंडली या दशा नही देती हो तभी आप अपने विचार सभी के साथ साझा करें वरना आपके विचारों की महत्वता सुन्य होगी ।
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